जब किसी आरोपी को कोर्ट में पेश किया जाता है, तो अक्सर पुलिस कहती है कि "हमें इससे और पूछताछ करनी…
जब किसी आरोपी को कोर्ट में पेश किया जाता है, तो अक्सर पुलिस कहती है कि "हमें इससे और पूछताछ करनी है या सबूत बरामद करने हैं, इसलिए इसकी पुलिस रिमांड दी जाए।"
पुलिस रिमांड बनाम ज्यूडिशियल रिमांड: पुलिस रिमांड का मतलब है आरोपी को वापस थाने के लॉकअप में भेजना, जहां प्रताड़ना का खतरा होता है। जबकि ज्यूडिशियल रिमांड का मतलब है सुरक्षित जेल भेजना।
विरोध की रणनीति (Opposing Remand): एक कुशल क्रिमिनल लॉयर के रूप में हम कोर्ट के सामने यह साबित करते हैं कि पुलिस ने पहले ही पर्याप्त पूछताछ कर ली है और अब रिमांड की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है। यदि पुलिस के पास ठोस आधार नहीं है, तो माननीय अदालत रिमांड खारिज कर आरोपी को सीधे जेल (Judicial Custody) भेज देती है।
मजबूत पैरवी ही सही न्याय की दिशा तय करती है।
📞 एडवोकेट स्मृति तिवारी (पटना हाई कोर्ट) | मोबा/व्हाट्सएप:
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